मार्क्स और झुआंगज़ी का मनोविज्ञान मार्क्स + झुआंगज़ी का दर्शन · हर व्यक्ति अपने आप में पूर्ण है

कर्मजनित बाधाओं की शृंखला

तथ्यों से सत्य की खोज: अपना निजी मायालोक

यह संसार रहस्यमय कल्पना और आध्यात्मिक साधना का संसार है—राक्षस, दानव, भूत-प्रेत; साधारण जन, अमर सिद्ध, बुद्ध और ताओ के साधक।
हर किसी को ताओ की साधना करनी है, हर किसी का अपना विशिष्ट मायालोक है।
अपने “विशिष्ट मायालोक” को पहचानना, फिर कर्मगत अवरोधों को स्वीकारना, उनके प्रति श्रद्धामय विस्मय रखना, उनका सामना करना और उनसे पार जाना।
लोग फ़ान झेनदोंग और झांग जीके जैसे सिद्धि पाने वालों को, मार्क्स और एंगेल्स को देखते हैं, तो ताओ की लय महसूस करने और अंतर्मन की साधना सीखने के लिए—यह देखने के लिए कि वे कैसे माया को भेदते हैं, ताओ में प्रवेश करते हैं, विपत्तियों से उबरते हैं, संकटों से निकलते हैं, मुक्ति पाते हैं और क्रांति करते हैं।
अपने को सँवारो, वर्तमान में जियो, तथ्यों के आधार पर सत्य खोजो, अपने ताओ की तलाश करो।
निज स्वरूप में सहज पूर्णता है, मनुष्य और प्रकृति एक हैं, हर कदम पर पूर्णता है, ताओ हमेशा पैरों तले ही है; कर्मगत अवरोध मनुष्य को ऐसे चक्कर में डाल देते हैं मानो भूतों ने रास्ता भटका दिया हो। सुख, पूर्णता, पार का तट, उत्तर, निकलने का रास्ता और कुंजी—सब वर्तमान में हैं।
बहुत-से प्रतिरूप तब तक बार-बार दोहराते रहते हैं, जब तक उनका उदात्तीकरण नहीं हो जाता।
प्रकाश से जुड़ाव–कर्मगत अवरोधों में उलझाव, समाधि में प्रवेश–रूपों से आसक्ति, जागृति–पतन, ताओ का लोक–माया का लोक: निरंतर दोलन, सर्पिल गति से उत्थान।
जागृति और स्वभाव के प्रकाश से ही हर चीज़ को यथार्थ रूप में देखना और तथ्यों के आधार पर सत्य खोजना संभव होता है।
मन की गहरी चेतना में जियो।

“विशिष्ट मायालोक” की अवधारणा एक अहम प्रश्न सुलझाती है: कर्मगत अवरोध अब साधारण नहीं रह जाते, वे नायक की यात्रा बन जाते हैं।