कम मानसिक ऊर्जा का सिंड्रोम: टालमटोल, मानसिक बैटरी का चुकना और मानसिक ऊर्जा का दमा
टालमटोल
काम करने के लिए मनोबल चाहिए -> मनोबल कम है, इसलिए टालमटोल -> टालमटोल के कारण भीतर की खींचतान और खुद पर हमले, जिससे मनोबल और कम हो जाता है
नकारात्मक अहं वास्तविकता को ठुकराता है -> टालमटोल -> खुद पर हमले और भीतर की खींचतान
《टालमटोल की बीमारी एक छद्म अवधारणा है》《टालमटोल के प्रति रवैये से अपने चिंतन के प्रति सजगता का महत्त्व समझना》《जद्दोजहद एक छद्म अवधारणा है》
मनोबल की बैटरी खाली
मनोबल कम होने पर अड़चन पार नहीं होती, हम अटक जाते हैं, ठहर जाते हैं, चेतना धुँधली रहती है, दिमाग पर धुंध छाई रहती है, भीतर खींचतान और ऐंठन चलती रहती है, आराम नहीं कर पाते; मनोबल की बैटरी खाली हो जाती है और मानसिक चिंतन उथले में फँस जाता है।
आराम कोई औपचारिकता, अभ्यास, कार्य या आत्म-अनुशासन नहीं है; वह साहस और रणनीति है, खुद को अनुमति देना है, बिना किसी कार्य के मन के मुताबिक रहना है।
इसलिए, आराम करने की क्षमता मनोबल से आती है <-> लेकिन मनोबल कम हो तो आराम नहीं कर पाते, मनोबल बहाल नहीं कर पाते।
यह एक गतिरोध है। ठीक पेट्रोल की गाड़ी की तरह: बैटरी खाली हो तो इंजन चालू नहीं होता, और इंजन चालू न हो तो बैटरी चार्ज नहीं होती—गाड़ी अटककर बंद पड़ी रहती है।
《मनोबल को भरपूर बनाए रखना सबसे पहली प्राथमिकता है》
मनोबल का ज्वार उतरता है -> मानसिक चिंतन उथले में फँस जाता है
मनोबल का ज्वार उतरता है -> मानसिक चिंतन उथले में फँस जाता है, सोच बेनतीजा घूमती रहती है, नज़र सुरंग जैसी संकरी हो जाती है, समय से पहले चिंता होने लगती है, सोच-विचार हद से बढ़ जाता है
मनोबल का दमा
चिंता और निराशा के कारण -> जरूरत से ज्यादा जोर लगाना -> कामेच्छा-ऊर्जा का अति-दोहन, मनोबल का चुक जाना, आसक्ति, लोभ, द्वेष और मोह में भीतर ही भीतर खपना -> जोर लगाना मुश्किल लगता है, साँस नहीं आती -> इसलिए चिंता और निराशा होती है।
बेहाल होकर आगे बढ़ना, दौड़ते हुए हाँफना, हाँफते हुए दौड़ना। इसका संबंध रात के पहरेदार जैसे छोटे अहं से भी है: मनोबल जितना कम होता है, उसकी तनाव-प्रतिक्रिया और भीतर की खींचतान उतनी ही गंभीर हो जाती है। एक दुष्चक्र।
कमज़ोर मनःस्थिति बनाम नकारात्मक अहं
नकारात्मक अहं कमज़ोर मनःस्थिति की इजाज़त नहीं देता -> कमज़ोर मनःस्थिति -> नकारात्मक अहं
आराम
《आराम के लिए बड़ी समझ, बड़ा साहस और बड़ी मानसिक स्थिरता चाहिए》《मनोबल को भरपूर बनाए रखना सबसे पहली प्राथमिकता है》《टहलना इस समय सबसे पहली प्राथमिकता है》
जीवन की एकमात्र चुनौती इस क्षण की तकलीफ़ है। एकमात्र सवाल जिससे जूझना है, वह कमज़ोर मनःस्थिति है।《वर्तमान में जीने पर》