मार्क्स और झुआंगज़ी का मनोविज्ञान मार्क्स + झुआंगज़ी का दर्शन · हर व्यक्ति अपने आप में पूर्ण है

जुड़ाव शृंखला

जहाँ मन को चैन मिले, वही मेरा घर है—घर छोड़कर पार्क पहुँचने पर ही खुद को पाता हूँ; क्या पार्क ही मेरा घर है

एक、जहाँ यह मन चैन पाए
इंटरनेट पर एक व्यक्ति ने लिखा:
जब मैं घर से निकलकर पार्क पहुँचता हूँ, तभी मुझे अपना सच्चा स्व मिलता है, तभी मैं तरह-तरह के भटकते विचारों और हठपूर्ण आसक्तियों से बाहर निकल पाता हूँ।

तो क्या वह घर अब भी मेरा घर है? वह तो एक ऐसी स्थिति है जिसमें मैं फँसा हुआ हूँ।

कई बार तो पार्क तक जाने की भी ज़रूरत नहीं पड़ती। जब मैं सीढ़ियों से नीचे उतरता हूँ, चमकीली धूप मुझ पर पड़ती है और मैं सिर उठाकर नीले आकाश और सफ़ेद बादलों को देखता हूँ, तो घर में घेरे रहने वाली बहुत-सी परेशानियाँ अचानक गायब हो जाती हैं।

कब आपका मकान, आपका घर, सचमुच आपका घर होता है?

बेशक, बहुत-से लोगों के मुक़ाबले मेरी ख़ुशक़िस्मती यह है कि कम-से-कम पार्क पहुँचकर मैं अपने सच्चे, शांत स्व को पा सकता हूँ।

बहुत-से लोगों को उसे पाने के लिए बहुत दूर भाग जाना पड़ता है।

अधिकतर लोग इस तरह बार-बार दूर निकलने और एक स्थिति से दूसरी स्थिति में जाने के किसी क्षण में अपने स्व को पा लेते हैं।

सू शि की यह पंक्ति, “जहाँ यह मन चैन पाए, वही मेरी जन्मभूमि है”, सचमुच साधना का सत्य है। बेचैन मन से असंख्य दानव जन्म लेते हैं; शांत मन से असंख्य मार्ग उपजते हैं।

दो、कंप्यूटर, मोबाइल और स्वतंत्र ऑनलाइन मीडिया के अंतर्विरोध

घर में मुझे कंप्यूटर का सामना करना पड़ता है, और कंप्यूटर अपने आप में एक अंतर्विरोध है: वह काम भी है और आराम व मनोरंजन भी; सजग ध्यान भी है और भटकते विचार भी; जानकारी को व्यवस्थित करना भी है और अव्यवस्थित ढंग से जानकारी सोखना भी। मोबाइल का भी सामना करना पड़ता है, और मोबाइल भी एक अंतर्विरोध है: वह मेलजोल भी है और अकेलापन तथा सामाजिक संबंधों से मिले आघात भी; निजता भी है और दख़ल तथा काम भी।

आज के काम करने के तरीक़ों में, काम से छुट्टी के बाद घर और काम आपस में घुल-मिल जाते हैं, काम निजी जीवन में घुस आता है।

स्वतंत्र ऑनलाइन मीडिया में काम करने वालों के लिए यह मीडिया भटकते विचार भी है और सजग ध्यान भी; काम भी है और मनोरंजन भी। वे रचनाकार भी हैं और दर्शक भी। कभी-कभी लोग भटकते विचारों, सोच-विचार, लेख, प्रचार-सामग्री और रचनाओं के बीच की सीमाएँ समझ नहीं पाते।

यह युग लोगों की काम और विश्राम के बीच संतुलन बनाए रखने तथा अत्यधिक सजग रहने की क्षमता की और अधिक परीक्षा लेता है। पिछला लेख: 《श्रम और बेगारी के संयोजन पर》