जीवन और भावनात्मक अंतर्द्वंद्व की मूसलाधार बारिश व पहाड़ी बाढ़ में अपनी देखभाल: शून्यता, निस्तब्धता और शांति
जीवन हमेशा कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा रहता है, मनःस्थिति हमेशा बदलती रहती है, पीड़ा बार-बार लौट आती है।
ज़रूरी यह है कि अपने लिए मुश्किलें न बढ़ाएँ, अपना ख़याल रखें।
एक、शून्यता
- बाहरी उत्तेजना बेहद कम रखें; सादगी और जीवन से भरी प्रकृति में रहें, रात के अँधेरे में किसी सुरक्षित, शांत पार्क में रहें।
- अनावश्यक लोगों से दूर रहें।
- मस्तिष्क के अग्रललाट क्षेत्र की उत्तेजना बेहद कम रखें, स्क्रीन से दूर रहें।
दो、शांति
दुख में आनंद खोजें, अव्यवस्था में शांति पाएँ, परेशानी में सुकून बनाए रखें।
तीन、सुकून
सोएँ, आराम करें, स्वस्थ और हल्का भोजन नियमित समय पर करें।
च्वांग-त्सु कहते हैं: “चित्त को संतुलित और शांत, स्पष्ट और रिक्त रखो; रिक्त कक्ष में उजाला जन्म लेता है।” शांति और सुकून में, मूल स्व स्वाभाविक रूप से स्वस्थ होने लगेगा और स्वयं को पोषित करेगा।
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