नाइटक्लब में ग्राहकों का साथ देने वाली लड़कियाँ और मार्क्स–च्वांग-त्सु का मनोविज्ञान
मिसाल के लिए, एक ऐसी स्कूली लड़की, जिसे प्यार की गहरी कमी रही है और जो आहत है, गुंडों के गिरोह में उलझ जाती है, नाइटक्लब में ग्राहकों का साथ देने का काम करती है। दुनिया, जीवन और मूल्यों के बारे में उसकी धारणाएँ भटक गई हैं और उलझी हुई हैं, उसमें तरह-तरह की बुरी आदतें पड़ गई हैं। पाँच तत्वों (पढ़ाई, करियर, सामाजिक संबंध, शरीर और मन) के बीच जुड़ाव बुरी तरह टूट गया है और वे आपस में उलझ गए हैं। उसकी मानसिक ऊर्जा चुक गई है, उसकी आध्यात्मिकता को चोट पहुँची है और वह अस्तित्वगत संकट में है।
दर्शक बनकर देखें, तो कर्म और कर्मगत अवरोधों का क्रमिक विकास दिखाई देता है। गहरे कर्मगत अवरोध असल में सतही कर्मगत अवरोधों से ज़्यादा सरल और विशुद्ध होते हैं।
परामर्शदाता के काम का सिद्धांत बस एक अच्छी माँ और एक दर्पण की भूमिका निभाना है। बस उसके साथ रहना, उसे शांत होने, खुद को स्वीकार करने, अपने विचारों और समझ को दर्शक की तरह देखने, दुनिया, जीवन और मूल्यों के बारे में अपनी धारणाओं को टटोलने की ओर ले जाना; कुछ बहुत छोटे काम करना, थोड़ा-थोड़ा जुड़ाव बनाना और धीरे-धीरे एक सकारात्मक चक्र स्थापित करना। लेकिन “वर्तमान में जीना” इस लड़की के लिए बहुत कठिन और अमूर्त है।
मन को सँभालने की प्रक्रिया का मूल यह है कि मनुष्य की अपनी प्रकृति में सहज पूर्णता है, उसकी दिव्य प्रकृति स्वयं अपना उद्धार करती है। इस लड़की का डॉयिन खोलकर देखें, तो शायद उसने भी सकारात्मक ऊर्जा और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाले बहुत-से वीडियो सहेज रखे होंगे। यही मानव-प्रकृति की ऊपर उठने वाली सहज पूर्णता है। जड़ों की खोज ही जड़ है। आदिम मैं, लघु अहं, अनात्म।
और अपने और दूसरे के हिस्से के प्रश्नों को अलग रखना, कर्मगत अवरोधों के प्रति आदर और विस्मय रखना है। लोग अपने आत्ममोह में चाहते हैं कि चंद बातें कहकर किसी को सही राह पर ले आएँ, चंद बातों से किसी को बचा लें और बदल दें—यह इतना आसान कहाँ है। हर कोई अपनी नियति की पटकथा में संघर्ष कर रहा है। जो अपना है, वही दुनिया का है; अपने जैसा होना ही एकमात्र असली काम है।
हममें कौन है जो पैसे के लिए खुद को बेचने नहीं निकलता। यही वह अलगाव है जिसकी बात मार्क्स और च्वांग-त्सु करते हैं। छोटे और अति-छोटे पूँजीपति भी एक जैसे ही हैं। सर्वहारा (नाइटक्लब के सफाईकर्मी) कर्मगत अवरोधों में इतनी गहराई तक नहीं उलझे हैं, इसलिए वे अधिक प्रगतिशील हैं। मार्क्स + च्वांग-त्सु + मनोविज्ञान, साइबरपंक की दुनिया में परमाणुओं की तरह एकाकी हो चुके व्यक्तियों के आत्म-उद्धार और मुक्ति का दर्शन है।
मैं अक्सर कहता हूँ कि इंसान दूसरों को सलाह नहीं दे सकता; मेरा इशारा ऐसे ही हालात की ओर होता है। मैं अक्सर कहता हूँ कि देने लायक एकमात्र सलाह है डायरी लिखना और टहलना। लेकिन इस लड़की के लिए शायद यह भी बहुत कठिन हो। इंसान की पूरी ज़िंदगी नियति पर निर्भर है।
मैं हमेशा से मानवतावादी ऐप बनाना चाहता रहा हूँ। सवाल यही है कि यह लड़की किस तरह का ऐप इस्तेमाल करे जिससे उसकी मानसिक ऊर्जा को पोषण मिले। अनुशंसा प्रणालियों वाले ऐप, सामाजिक ऐप, मार्क्स–च्वांग-त्सु मनोविज्ञान एजेंट, और मेरे बनाए मार्क्स–एंगेल्स की संपूर्ण रचनाओं के वीडियो भी इसमें शामिल हैं।
हाल में जिस विषय पर मुझे कुछ बोध हुआ है, वह है गहरे चित्त में जीना, विचारों की उधेड़बुन में नहीं। “मैं” तो है ही नहीं। अनात्म है, केवल ताओ है। कर्मगत अवरोध भी ताओ हैं। कर्मगत अवरोध भी ब्रह्मांड का हिस्सा हैं।