मार्क्स और झुआंगज़ी का मनोविज्ञान मार्क्स + झुआंगज़ी का दर्शन · हर व्यक्ति अपने आप में पूर्ण है

जुड़ाव शृंखला

सामाजिक संबंधों का चयन

सामाजिक संबंधों की छँटाई
यहाँ संबंधों से आशय किसी भी व्यक्ति के साथ संबंध से है।
एक、अच्छे संबंध
(一)वे कैसे होते हैं?
1.एक-दूसरे को स्वीकारना, सम्मान देना, पोषित करना और आगे बढ़ने में मदद करना।
2.दोनों का एक-दूसरे की ओर बढ़ना, दो लोगों का साथ नाचना; अधिक से अधिक कभी पैर पर पैर पड़ जाए तो हँस देना। इनमें खुद को काट-छाँटकर ढालने और भीतर ही भीतर ऐंठते रहने की इतनी ज़रूरत नहीं होती।
3.फलने-फूलने देने और क्षीण करने का अंतर: संबंध आपको अधिक व्यापक, सहज, शांत, सच्चा, ठोस, स्थिर और सरल बनाए, न कि संकुचित, तनावग्रस्त, बेचैन, बनावटी, खोखला, भ्रमित और सतही। क्षीण करने का अर्थ है आपकी समझ-बूझ घटाना, आपको भीतर ही भीतर खपाना और आपकी योग्यता तथा नैतिकता, दोनों को नुकसान पहुँचाना। ऐसा संबंध आपको ज़ोर लगाने पर भी मजबूर करता है; आपका खून चूसना उसके मूल उद्देश्यों में से एक है।
(二)लोगों के अलग-अलग दर्जे होते हैं
S के करीब रहें, B से दूर। S श्रेणी के लोगों से अधिक मेलजोल रखें। उसके बाद A श्रेणी के लोगों से। चिकनी-चुपड़ी बातों वाले, औसतपन में डूबे B और उससे नीचे की श्रेणी के लोगों से दूर रहें।
घटिया संबंधों से बेहतर है संबंधों की कमी। यह बात सब समझते हैं, लेकिन व्यवहार में अक्सर भूख इतनी होती है कि जो मिले, स्वीकार लेते हैं।
(三)दोस्त बनाने के मानदंड
1.परस्पर आदर
अक्सर यह गलती होती है कि हम मान लेते हैं, समय बीतने पर लगाव हो ही जाएगा और जान-पहचान गहरी होकर पक्की दोस्ती बन जाएगी। कई तथाकथित पक्के दोस्तों में वास्तव में परस्पर आदर नहीं होता; यहाँ तक कि एक-दूसरे को समझना और स्वीकारना भी नहीं होता। सहपाठी, एक ही इलाके के निवासी, पड़ोसी या रिश्तेदार होने का लगाव हो सकता है, लेकिन उन्हें सचमुच मन और भावनाओं का दोस्त नहीं माना जा सकता।
2.ऊँची आवृत्ति की ऊर्जा वाले लोग
उदात्त लोग, जिनकी उदात्तता जीवन, संसार और मूल्यों के प्रति उनके गहरे दृष्टिकोण तथा व्यक्तित्व के मूल स्वरूप पर आधारित हो। सादगी, सत्य, अच्छाई और सुंदरता वाले; मानवतावादी, अंतरराष्ट्रीयतावादी और मार्क्सवादी-लेनिनवादी — सच्चे अर्थों में।
(四)खुद से प्रेम करें
जो खुद से प्रेम करता है, उसी में दूसरों से प्रेम करने की क्षमता होती है। जो खुद से प्रेम करता है, उसे ही दूसरों का प्रेम मिलता है।
खुशी का रहस्य: लोगों को छाँटने में सख्ती, अपने साथ नरमी।
दो、फलने-फूलने देने वालों के करीब, क्षीण करने वालों से दूर
(一)दूर हो जाएँ
नुकसान को जल्दी रोकें। टकराव से डरने की ज़रूरत नहीं। खुश करने की कोशिश न करें, लंबी-लंबी सफाइयाँ न लिखें।
(二)सस्ते संबंधों, असली होने का दिखावा करने वाले बनावटी संबंधों और न लाभ देने वाले, न आसानी से छोड़े जा सकने वाले संबंधों से दूर रहें
यह सोचना गलत है कि अपना सब कुछ देने से सच्चा स्नेह मिलेगा या समय बीतने से लगाव गहरा हो जाएगा।
इंसान केवल खुद को नियंत्रित कर सकता है। दूसरों को प्रभावित करने, गढ़ने, अपने सद्भाव से बदलने या बदल डालने की उम्मीद न रखें। दूसरों के संबंध में इंसान केवल छँटाई कर सकता है और दूरी बनाए रख सकता है। माता-पिता और बच्चों के मामले में भी, बल्कि विशेष रूप से उन्हीं के मामले में।
(三)बीमार लोगों, विषैले लोगों और कचरा फैलाने वाले लोगों से दूर रहें
इस दुनिया में स्वस्थ लोग कम हैं। चित्र खींचकर कहें तो यह ज़ॉम्बियों की दुनिया है। बीमारी, विष और कचरा फैलाने वाले लोगों से दूर रहें।
दूसरों को बचाने से पहले खुद को बचाएँ। आँख मूँदकर बीमार लोगों को बचाने में लगना और खुद संक्रमित होकर बीमार पड़ जाना मूर्खता है।
1.आपको नकारने वाले लोग
हर किसी में कभी न कभी आत्मविश्वास की कमी और खुद पर संदेह होता है; यही सबसे बड़ी कमज़ोरी है। कुछ खास लोगों के संदेह अक्सर आपकी इसी कमज़ोरी को भेदते हैं, और इनमें से 99% लोग ऐसे संदेह करते हैं जो आपको क्षीण करते हैं, फलने-फूलने में मदद नहीं करते।
घाव के रास्ते भीतर आने वाली चीज़ों में दवा कम, ज़हर अधिक होता है। कानों को कड़वी लगने वाली हितकारी बातों जैसी बातें कम, चोट पहुँचाने वाली बातें अधिक होती हैं; कुछ तो ट्रोजन प्रोग्राम जैसी भी होती हैं — मनोवैज्ञानिक हेरफेर (PUA)। सद्भावनापूर्ण आलोचना और किसी को नकारना दो अलग बातें हैं।
2.शोषण करने वाले लोग
खून चूसने वाले पिशाच, प्राणशक्ति चूसने वाले दानव, चेतना चूसने वाले राक्षस। ऐसे बहुत से लोग कड़वी मगर हितकारी बातें कहने वाले का रूप धरकर सामने आते हैं।
3.सस्ते संबंधों, बनावटी संबंधों और न लाभ देने वाले, न आसानी से छोड़े जा सकने वाले संबंधों से दूर रहें
इंसान अक्सर भूख में जो मिले, स्वीकार कर लेता है; लेकिन खुद को बचाना है तो घटिया संबंध स्वीकारने के बजाय उनकी कमी स्वीकारनी ही होगी।
(四)अधिकांश लोगों को नज़रअंदाज़ करें
दरअसल अधिकांश लोग एक-दूसरे से अपनी आखिरी मुलाकात पहले ही कर चुके हैं।
अधिकांश लोग खुद की या अपने बच्चों की भी देखभाल करना नहीं जानते, यहाँ तक कि उनकी परवाह तक नहीं करते; आपकी देखभाल और परवाह करना तो दूर की बात है।
अधिकांश लोगों को खुश करने की कोशिश न करें। जिनका आजीवन पेशा अधिकांश लोगों को खुश करना है — राजनेता और मनोरंजन जगत के लोग — सोचिए, उनमें से कितने इसे अच्छी तरह कर पाते हैं?
“अधिकांश लोगों” से आपका डर असल में दुनिया और समाज से आपका डर है। इसलिए खुद को पाना और अच्छे संबंध खोजना और भी ज़रूरी है।
तीन、छँटाई के तरीके
लोगों को छाँटने में सख्ती, अपने साथ नरमी।
A.अपने आसपास के हर व्यक्ति को एक-एक करके परखें और पहचानें कि क्या उसके साथ आपका संबंध परस्पर स्वीकार, सम्मान और पोषण का है।
B.क्या सामने वाले में खुद से और दूसरों से प्रेम करने की क्षमता है? वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करता है? क्या उसके सच्चे दोस्त हैं?
C.पहचानने का एक और अधिक स्पष्ट तरीका: यदि सामाजिक या रक्त-संबंधों और पहले से मौजूद रिश्ते को हटा दें, और सामने वाला बिल्कुल अजनबी हो, तो क्या आप उससे परिचय करना चाहेंगे?
चार、गरिमावान व्यक्ति बोलने में जल्दबाज़ी नहीं करता
संबंध स्पष्ट हो जाएँ तो बहुत-सी बातें कहने की ज़रूरत नहीं रहती, बहुत-सा गुस्सा भी नहीं आता।
बोलने की इतनी जल्दी नहीं रहती, क्योंकि सामने वाला सुन रहा होता है और कहने का असर होता है।
《केवल प्रथम श्रेणी और उससे भी ऊपर के लोगों से संवाद करें》
पुनश्च।
एक अन्य लेख, 《अत्यधिक संवेदनशील लोगों की संवेदनहीनता》 से अंश: अत्यधिक संवेदनशील लोग दूसरों की भावनाओं, रवैये और हर चीज़ के प्रति संवेदनशील होते हैं, लेकिन सबसे केंद्रीय, सबसे बुनियादी बात के प्रति संवेदनशील नहीं होते: क्या सामने वाला सचमुच उनसे प्रेम करता है और उनका सम्मान करता है? यह भयावह, घातक संवेदनहीनता जीवन के शुरुआती 20, 30 वर्षों में खराब वातावरण में अनुकूलित किए जाने से पैदा होती है।